Monday, January 30, 2017

साप्ताहिक चौपाइयाँ


1/30/2017

नाना भाँति राम अवतारा। 

रामायन शत कोटि अपारा॥


श्रीराम जी के अवतार अनेक प्रकार के हैं और वाल्मीकि जी द्वारा सौ करोड़ रामायण बनायी गयीं उनके अतिरिक्त अन्य मुनियों द्वारा भी अनेक रामायण बनायी गयी हैं।

1/23/2017

नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं। 

प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं॥


संसार में कोई भी ऐसा नहीं जन्मा, जिसे प्रभुता पाकर मद नहीं हुआ हो।

1/16/2017

मन क्रम बचन छाड़ि चतुराई। 

भजत कृपा करिहैं रघुराई॥


मन, कर्म और वचन से चतुरता छोड़कर भजन करने से रघुकुल के राजा श्रीराम कृपा करेंगे ही।

1/9/2017

जेहि बिधि होइ नाथ हित मोरा। 

करहु सो बेगि दास मैं तोरा॥


हे नाथ! जिस प्रकार से मेरा हित हो आप वह शीघ्र कीजिये। मैं आपका दास हूँ।

1/9/2016

जेहि बिधि नाथ होई हित मोरा। 

करहु सो बेगि दास मैं तोरा॥


हे नाथ! जिस प्रकार से मेरा हित हो आप वह शीघ्र कीजिये। मैं आपका दास हूँ।

1/2/2017

सब कर परम प्रकाशक जोई। 

राम अनादि अवधपति सोई॥


जीवात्मा से लेकर विषयपर्यन्त सभी की चेतना एक-दूसरे के आधीन है, केवल भगवान् श्रीराम की चेतना पराधीन नही स्वतःसिद्ध स्वाधीन है।

12/26/2016

जगत प्रकाश्य प्रकाशक रामू। 

मायाधीश ग्यान गुन धामू॥


यह चिदचिदात्मक् जगत् प्रकाश्य है और भगवान् श्रीराम उसके प्रकाशक हैं। वे माया के अधिपति तथा ज्ञान एवं कल्याण गुणगणों के धाम हैं।

12/19/2016

होइहि सोइ जो राम रचि राखा। 

को करि तर्क बढ़ावै शाखा॥


वही होगा जो श्रीराम ने रच कर रखा है। इसमें कौन तर्क करके नाना प्रकार के विचारों की शाखा बढ़ाये।

12/12/2016

रामचंद्र के चरित सुहाए। 

कलप कोटि लगि जाहिं न गाए॥


श्रीरामचन्द्र जी के सुहावने चरित्र करोड़ों कल्प पर्यन्त नहीं गाये जा सकते।

12/5/2016

हरि अनंत हरि कथा अनंता। 

कहहिं सुनहिं बहु बिधि सब संता॥


श्रीहरि भगवान् श्रीराम अनन्त हैं और उनकी कथाएँ भी अनन्त हैं। अनन्त श्रीराम की अनन्त कथाओं को सभी सन्तगण बहुत प्रकार से कहते और सुनते हैं।

11/28/2016

श्रीगुरुपद नख मनिगन जोती। 

सुमिरत दिब्य दृष्टि हिय होती॥


मैं श्रीगुरुदेव के श्रीचरण के नखरूप मणिगणों की ज्योति का स्मरण करता हूँ, जिसके स्मरणमात्र से हृदय में दिव्यदृष्टि उत्पन्न हो जाती है, जिसका सुन्दर प्रकाश मोहरूप अंधकार को नष्ट कर देता है और अशु अर्थात् प्राणों को प्रकाशित कर देता है।

11/21/2016

बंदउँ गुरु पद पदुम परागा। 

सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥


मैं श्रीगुरुदेव के श्रीचरणकमल की धूलरूप पराग का वन्दन करता हूँ, जो सुन्दर रुचिरूप सुगन्ध तथा अनुपम अनुरागरूप मकरंद से पूर्ण है।

11/14/2016

अति प्रचंड रघुपति कै माया। 

जेहि न मोह अस को जग जाया॥


रघुकुल के स्वामी भगवान् श्रीराम की माया अत्यन्त प्रचण्ड अर्थात् बहुत भयंकर और बहुत ही बलशालिनी है, संसार में ऐसा कौन जन्मा है, जिसे यह नहीं मोहित कर देती?

11/7/2016

सतसंगति मुद मंगलमूला। 

सोइ फल सिधि सब साधन फूला॥


सन्त की संगति प्रसन्नता और मंगल की मूल है, उसकी सिद्धि अर्थात् प्राप्ति फल है और सभी साधन पुष्प हैं।

10/31/2016

शठ सुधरहिं सतसंगति पाई। 

पारस परसि कुधातु सुहाई॥


शठ भी सत्संगति पाकर सुधर जाते हैं, क्योंकि पारस यानी स्पार्श मणि का स्पर्श करके कुधातु अर्थात् लोहा भी सुहावनी धातु अर्थात् सोना बन जाता है।

10/24/2016

रामकथा सुंदर कर तारी। 

संशय बिहग उड़ावनहारी॥


श्रीरामकथा अत्यन्त सुन्दर हाथ की ताली है, जो संशयरूप पक्षी को उड़ानेवाली है अर्थात् जैसे ताली बजाने से पक्षी उड़ जाते हैं, उसी प्रकार श्रीरामकथा से संशय समाप्त हो जाता है।



Wednesday, December 28, 2016

राम रक्षा स्तोत्र





राम नाम की महिमा

*देवादिदेव महादेव जी द्वारा राम नाम की महिमा*

***महादेव जी को एक बार बिना कारण के किसी को प्रणाम करते देखकर पार्वती जी ने पूछा आप किसको प्रणाम करते रहते हैं?
शिव जी ने अपनी धर्मपत्नी पार्वती जी से कहते हैं की, हे देवी! जो व्यक्ति एक बार *राम* कहता है उसे मैं तीन बार प्रणाम करता हूँ। 🙏🙏🙏

***पार्वती जी ने एक बार शिव जी से पूछा आप श्मशान में क्यूँ जाते हैं और ये चिता की भस्म शरीर पे क्यूँ लगते हैं?
उसी समय शिवजी पार्वती जी को श्मशान ले गए। वहाँ एक शव अंतिम संस्कार के लिए लाया गया। लोग *राम नाम सत्य है* कहते हुए शव को ला रहे थे। 
शिव जी ने कहा की देखो पार्वती इस श्मशान की ओर जब लोग आते हैं तो *राम* नाम का स्मरण करते हुए आते हैं। और इस शव के निमित्त से कई लोगों के मुख से मेरा अतिप्रिय दिव्य *राम* नाम निकलता है उसी को सुनने मैं श्मशान में आता हूँ, और इतने लोगो के मुख से *राम* नाम का जप करवाने में निमित्त बनने वाले इस शव का मैं सम्मान करता हूँ, प्रणाम करता हूँ, और अग्नि में जलने के बाद उसकी भस्म को अपने शरीर पर लगा लेता हूँ। *राम* नाम बुलवाने वाले के प्रति मुझे इतना प्रेम है। 

***एक बार शिवजी कैलाश पर पहुंचे और पार्वती जी से बहुजन माँगा। पार्वती जी विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर रहीं थी। पार्वती जी ने कहा अभी पाठ पूरा नही हुआ, कृपया थोड़ी देर प्रतीक्षा कीजिए। शिव जी ने कहा की इसमें तो समय और श्रम दोनों लगेंगे। संत लोग जिस तरह से सहस्र नाम को छोटा कर लेते हैं और नित्य जपते हैं वैसा उपाय कर लो। 
पार्वती जी ने पूछा वो उपाय कैसे करते हैं? मैं सुन्ना चाहती हूँ। 
शिव जी ने बताया, केवल एक बार *राम* कह लो तुम्हे सहस्र नाम, भगवान के एक हज़ार नाम लेने का फल मिल जाएगा। एक *राम* नाम हज़ार दिव्य नामों के समान है। पार्वती जी ने वैसा ही किया। 

पार्वत्युवाच -
*केनोपायेन लघुना विष्णोर्नाम सहस्रकं?*
*पठ्यते पण्डितैर्नित्यम् श्रोतुमिच्छाम्यहं प्रभो।।*
ईश्वर उवाच-
*श्री राम राम रामेति, रमे रामे मनोरमे।*
*सहस्र नाम तत्तुल्यम राम नाम वरानने।।*

यह *राम* नाम सभी आपदाओं को हरने वाला, सभी सम्पदाओं को देने वाला दाता है, सारे संसार को विश्राम/शान्ति प्रदान करने वाला है। इसीलिए मैं इसे बार बार प्रणाम करता हूँ। 

*आपदामपहर्तारम् दातारम् सर्वसंपदाम्।*
*लोकाभिरामम् श्रीरामम् भूयो भूयो नमयहम्।।*

 भव सागर के सभी समस्याओं और दुःख के बीजों को भूंज के रख देनेवाला/समूल नष्ट कर देने वाला, सुख संपत्तियों को अर्जित करने वाला, यम दूतों को खदेड़ने/भगाने वाला केवल *राम* नाम का गर्जन(जप) है। 

*भर्जनम् भव बीजानाम्, अर्जनम् सुख सम्पदाम्।*
*तर्जनम् यम दूतानाम्, राम रामेति गर्जनम्।*

प्रयास पूर्वक स्वयम् भी *राम* नाम जपते रहना चाहिए और दूसरों को भी प्रेरित करके *राम* नाम जपवाना चाहिए। इस से अपना और दोसरों का तुरन्त कल्याण हो जाता है। यही सबसे सुलभ और अचूक उपाय है।  इसीलिए हमारे देश में प्रणाम *राम राम* कहकर किया जाता है। 🙏
*।।राम राम।।*🙏

Saturday, October 29, 2016

धनद कोटि शत सम धनवाना। माया कोटि प्रपंच निधाना।।



धनद कोटि शत सम धनवाना। माया कोटि प्रपंच निधाना।।
भार धरन शत कोटि अहीशा। निरवधि निरुपम प्रभु जगदीशा।।

भगवान् श्रीराम अरबों कुबेरों के समान धनवान हैं और करोड़ों मायाओं के समान जगत् प्रपंच के निधान अर्थात कोश हैं। अरबों शेषनागों के समान भगवान् श्रीराम जगत् का भार धारण कर सकते हैं। प्रभु अवधिरहित और उपमारहित हैं तथा एकमात्र भगवान् श्रीराम ही सर्वशक्तिमान और जीव जगत् के ईश्वर हैं।

Monday, October 17, 2016

बिनु सतसंग बिबेक न होई।

Ram Ram dear friends. 😊🙏 This week's chaupai is:
बिनु सतसंग बिबेक न होई। 
रामकृपा बिनु सुलभ न सोई॥

बिना सत्संग के विवेक नहीं होता और भगवान् श्रीराम की कृपा के बिना वह सत्संग सुलभ नहीं हो पाता।

Friday, October 14, 2016

Namami Bhakta Vatsalam

राम राम 
 
Starting Saturday, October 15 Kartik month is starting. It is one of the most auspicious month for us. 

During this month we offer Ghee Diya to Shri Tulasi Devi and Shri Ramji.
 
We also recite the Stuti during regular Pooja for the whole Kartik month. 

For your convenience, I am sending the text and youtube link for the stuti sung by Guruji.

This stuti is from Sri Ramcharitmanas and is sung by Atri muni when Sri Ramji was about to leave Chitrakoot after residing 12 years.
 
राम राम

Jagadguru Rambhadracharya - Manas Stutis 05 - Namami Bhakta Vatsalam - YouTube

https://m.youtube.com/watch?v=Kw5BXzbsZx0




Wednesday, October 12, 2016

शनि बाधा से मुक्ति -

शनि बाधा से मुक्ति - 
Getting freed of the Malefic of Saturn- 

मत्कृता यां भवेद्बाधा महादुखौध दायिनी।
रामनाम्नो जपोत्साही मुच्यते स्वल्पकालतः॥
Mat-krta yam bhaved-badha maha-dukhaudha dayini 
Rama-namno japotsahi muchyate svalpa-kalatah 

(मेरे कोपके कारण जो महादुख समुह को देने वाली ग्रहबाधा यदि उपस्थित हो, तो उत्साह पुर्वक श्रीरामनाम जप करनेसे थोड़े ही समय में शान्त हो जाते हैं।
When one is troubled by the astrological influence of mine then he should chant the divine name of Shri Rama with great enthusiasm and as a result all the troubles would disappear in a short while.)

- शनिदेव , शनैश्चर स्मृति.
Shani deva, Shanaishchara smriti.